उत्तराखंडदेहरादून

भू राजस्व की समस्याओं के निस्तारण मे अहम साबित होगी वेब सुविधाएं

घर बैठे मोबाइल या इंटरनेट के माध्यम से खतौनी की सत्यापित प्रति, ऑनलाइन भुगतान कर प्राप्त की जा सकती है।

भू राजस्व ऑनलाइन सर्विस, आमजन के भू अधिकारों में साबित होगी मील का पत्थरः भट्ट

देहरादून 13 जनवरी। भाजपा ने जनहित से जुड़े 6 वेव सुविधाओं की शुरुआत को आम लोगों की भू राजस्व से जुड़ी अनेकों समस्याओं का सरल समाधान बताया है। प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कहा कि हम जनसामान्य को सशक्त बनाकर आधुनिक और विकसित उत्तराखंड बनाना चाहते हैं। धामी सरकार का ये कदम भू राजस्व के प्रबंधन और आमजन के भू अधिकारों में मील का पत्थर साबित होगा। जो ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के बाद अब ईज ऑफ लिविंग के क्षेत्र में नजीर बनेगा।
उन्होंने सरकार द्वारा शुरू किए इन डिजिटल इंडिया वेब एप्लीकेशन के नवीन संस्करण को डिजिटल इंडिया की भावना को राज्य में बढ़ाने वाला बताया। वहीं प्रदेशवासियों की तरफ से मुख्यमंत्री धामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके ये छह डिजीटल कदम, भू प्रबंधन और सुधारों को लेकर लंबी छलांग साबित होगा। कहा, जब हम विकसित भारत एवं विकसित उत्तराखण्ड के लक्ष्यो को पूरा करने की बात करते हैं तो कहीं न कहीं आम व्यक्ति के जीवन की समस्याओं के सरलीकरण, समाधान और निस्तारण बहुत जरूरी हो जाता है। डिजिटल इंडिया के अंतर्गत राजस्व से जुड़ी नई सेवाओं की इन ऑनलाइन सुविधाओं के उपलब्ध होने से नागरिक घर बैठे ही खतौनी सहित अन्य राजस्व संबंधी सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।
उन्होंने कहा कि अभिलेखों मे भी भूमि अभिलेखों से संबंधित सेवाओं में विशेष रूप से खतौनी की जरूरत प्रत्येक व्यक्ति को पड़ती है। लेकिन अब सरकार के एक कदम से उन्हें तहसील कार्यालय के चक्कर नहीं काटने होंगे। घर बैठे मोबाइल या इंटरनेट के माध्यम से खतौनी की सत्यापित प्रति, ऑनलाइन भुगतान कर प्राप्त की जा सकती है। इसी तरह एक और महत्वपूर्ण कदम है, प्रदेश में उद्योग एवं कृषि प्रयोजनों हेतु भूमि उपयोग, भूमि कार्य की अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया को पूर्णतः ऑनलाइन करना। जो इस प्रक्रिया की लंबी और तकनीकी उलझनों को बेहद आसान करेगी। अब इन नए डिजिटल ऐप से भूमि मानचित्र को सार्वजनिक डोमेन में निःशुल्क देखा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि राज्य में गोल खाते और संयुक्त खातों वाले भू प्रबंधन में हमेशा चुनौती रहा है। ऐसे में अब भूलेख अंश पोर्टल के तहत प्रदेश के खातेदारों एवं सहखातेदारों का पृथक-पृथक अंश निर्धारित डाटाबेस तैयार होगा, जिससे प्रदेश के किसानों की फार्मर रजिस्ट्री तैयार किये जाने का मार्ग प्रशस्त होगा। साथ ही भू-अभिलेखों में खातेदारों की जाति, लिंग एवं पहचान संख्या को भी संकलित करने से भविष्य की चुनौतियां का भी सामना करने में हम सफल होंगे।
प्रदेश में उद्योग एवं कृषि प्रयोजनों हेतु भूमि उपयोग या भूमि कार्य की अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया जटिल थी। इसमें बहुत समय और संसाधन जाया होता था, अब इसे एग्रीलोन पोर्टल के तहत पूर्णतः ऑनलाइन किया गया है। किसानों को बैंक से अपनी भूमि के सापेक्ष कृषि एवं कृषि संबंधित गतिविधियों हेतु ऋण लेने की प्रक्रिया को अपने मोबाइल पर पूरी कर सकते हैं। वहीं किसान या भूमि स्वामी पोर्टल के माध्यम से आसानी से ऋण आवदेन कर सकता है, ऋण अदायगी पर एन.ओ.सी जारी होने पर स्वतः ही चार्ज रिमूव भी जाएगा। वहीं बकायेदारों से वसूली भी ई-वसूली पोर्टल के माध्यम से बहुत आसान, प्रभावी, पारदर्शी हो जाएगी। जिसमें पूरी वसूली प्रकिया की प्रत्येक स्तर पर ट्रेकिंग की जा सकेगी।
उन्होंने कहा कि आज सभी क्षेत्रों में उत्तराखंड तेजी से आगे बढ़कर नई नजीर पेश कर रहा हैं। ऐसे में इस पहल से प्रशासनिक पारदर्शिता एवं नागरिक सुविधा में वृद्धि को लेकर भी राज्य नया मुकाम हासिल करेगा। वहीं उम्मीद जताई कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के साथ हम आने वाले दिनों में ईज ऑफ लिविंग के क्षेत्र में पथ प्रदर्शक साबित होंगे। पीएम मोदी के मार्गदर्शन में धामी सरकार की ये पहल, विज्ञान, आईटी और एआई के माध्यम से आमजन को अधिक से अधिक सहूलियत प्रदान  जा रही है।

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