उत्तराखंड

केदारघाटी में मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त

सीमांत क्षेत्रों में तापमान में लगातार गिरावट से जनजीवन खासा प्रभावित नजर आ रहा है।

तापमान में गिरावट से बढ़ी ग्रामीणों की मुश्किलें, कृषि और पशुपालन प्रभावित
रुद्रप्रयाग। केदार घाटी में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। क्षेत्र में एक ओर जहां भारी वर्षा के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में लोगों की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।
बारिश के कारण अचानक बढ़ी ठंड से विशेषकर बुजुर्गों और बच्चों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़ों और अलाव का सहारा लेना शुरू कर दिया है। सीमांत क्षेत्रों में तापमान में लगातार गिरावट से जनजीवन खासा प्रभावित नजर आ रहा है। बेमौसमी बारिश का असर कृषि कार्यों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। काश्तकारों की धान की बुवाई प्रभावित हो गई है, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ने लगी हैं। मदमहेश्वर घाटी के गैंड बस्ती निवासी प्रगतिशील काश्तकार बलबीर राणा ने बताया कि सामान्यतः अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक असिंचित धान की बुवाई पूरी हो जाती थी, लेकिन इस वर्ष लगातार बारिश के कारण यह कार्य प्रभावित हो गया है।
पशुपालन क्षेत्र भी इस आपदा से अछूता नहीं रहा। पशुपालकों को चारे की व्यवस्था और पशुओं की देखभाल में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बुरूवा गांव के भेड़पालक वीरेन्द्र धिरवाण के अनुसार, चैत्र माह में फुलारी-घोंघा विसर्जन के बाद भेड़पालक बुग्यालों की ओर रुख कर लेते थे, लेकिन इस बार खराब मौसम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अत्यधिक ठंड के चलते यह संभव नहीं हो पा रहा है।
इधर, केदारनाथ धाम में लगातार हो रही बर्फबारी से आगामी 22 अप्रैल से प्रस्तावित केदारनाथ यात्रा की तैयारियों पर भी असर पड़ रहा है। गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर यात्रा काल में दुकानें संचालित करने वाले व्यापारियों के सामने भी नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। लगातार बारिश और गिरते तापमान के कारण केदार घाटी में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है, जिससे स्थानीय प्रशासन और आमजन दोनों के सामने हालात सामान्य करने की चुनौती बनी हुई है।

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