उत्तराखंडदेहरादून

धार्मिक शिक्षा के लिए प्राधिकरण से मान्यता जरूरी

इन मदरसों ने विद्यालयी शिक्षा विभाग से मान्यता तो हासिल की है, लेकिन प्राधिकरण में पंजीकरण कराने में रुचि नहीं दिखाई है।

पांच लाख जुर्माने से लेकर मदरसा बंद होने तक की कार्रवाई का प्रावधान

देहरादून। उत्तराखंड में मदरसों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच अब ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं, जिनमें मदरसे विद्यालयी शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त होने के बावजूद उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण में पंजीकरण कराने से बच रहे हैं। खास बात यह है कि इनमें से कुछ मदरसों में धार्मिक शिक्षा भी दी जा रही है, जबकि नए प्रावधानों के तहत धार्मिक शिक्षा संचालित करने के लिए प्राधिकरण में पंजीकरण अनिवार्य है। ऐसे में शिक्षा विभाग की मान्यता लेकर प्राधिकरण के नियमों से बचने वाले मदरसे अब जांच के दायरे में आ गए हैं।
दरअसल, प्राधिकरण को प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से ऐसे मदरसों की सूचनाएं मिल रही हैं, जो धार्मिक शिक्षा को लेकर सरकार के नए नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इन मदरसों ने विद्यालयी शिक्षा विभाग से मान्यता तो हासिल की है, लेकिन प्राधिकरण में पंजीकरण कराने में रुचि नहीं दिखाई है। नियमों के मुताबिक केवल शिक्षा विभाग की मान्यता होने से धार्मिक शिक्षा संचालित करने की अनुमति नहीं मिल जाती। इसके लिए अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण में पंजीकरण कराना भी जरूरी है।
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष सुरजीत सिंह गांधी का कहना है कि सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की व्यवस्था को बेहतर और पारदर्शी बनाने के लिए नए प्रावधान लागू किए हैं। इनका उद्देश्य संस्थानों में निर्धारित नियमों के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
उन्होंने बताया कि धार्मिक शिक्षा को लेकर भी कुछ संस्थानों के संबंध में जानकारियां सामने आ रही हैं। बिना पंजीकरण धार्मिक शिक्षा संचालित करने वाले संस्थानों पर प्राधिकरण की नजर है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
नए प्रावधानों के तहत नियमों की अनदेखी करने वाले मदरसों पर आर्थिक दंड के साथ संचालन बंद करने तक की कार्रवाई का प्रावधान है। ऐसे संस्थानों पर पांच लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यानी अब केवल विद्यालयी शिक्षा विभाग से मान्यता हासिल कर मदरसा संचालित करना पर्याप्त नहीं होगा, यदि किसी संस्थान में धार्मिक शिक्षा दी जा रही है तो उसे प्राधिकरण के निर्धारित नियमों और पंजीकरण की प्रक्रिया का पालन करना होगा। आने वाले दिनों में ऐसे मदरसों के खिलाफ प्राधिकरण की कार्रवाई और तेज हो सकती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button